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बच्चों में विटामिन डी की कमी: लक्षण और जोखिम

16th जून, 2026

विटामिन डी की कमी

बच्चों में विटामिन डी की कमी काफी आम है, खासकर बढ़ते बच्चों में जिन्हें पर्याप्त धूप या उचित पोषण नहीं मिल पाता है। विटामिन डी कैल्शियम के अवशोषण, हड्डियों की मजबूती और समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब इसका स्तर कम होता है, तो यह हड्डियों की कमजोरी और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है, इसलिए इसकी शीघ्र पहचान महत्वपूर्ण है।

बच्चों के लिए विटामिन डी क्यों महत्वपूर्ण है?

शिशुओं और बच्चों के लिए विटामिन डी मजबूत हड्डियों और दांतों के निर्माण के लिए आवश्यक है। यह मांसपेशियों के कार्य, रोग प्रतिरोधक क्षमता और स्वस्थ विकास में भी सहायक होता है।

पर्याप्त विटामिन डी के बिना, शरीर कैल्शियम को प्रभावी ढंग से अवशोषित नहीं कर पाता है, जिसके परिणामस्वरूप समय के साथ हड्डियां नरम या कमजोर हो सकती हैं।

बच्चों में विटामिन डी की कमी के लक्षण 

बच्चों में विटामिन डी की कमी के लक्षणों को जल्दी पहचानना जटिलताओं को रोकने में मददगार हो सकता है। शिशुओं और बड़े बच्चों में विटामिन डी की कमी के कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं:

  • विकास में देरी: बच्चे अपनी उम्र के हिसाब से अपेक्षित दर से नहीं बढ़ पाते हैं। यह अक्सर बच्चों में विटामिन की कमी के शुरुआती लक्षणों में से एक होता है।

  • हड्डियों में दर्द या कमजोरी: बच्चे पैरों या जोड़ों में दर्द की शिकायत कर सकते हैं। कमजोर हड्डियां रोजमर्रा के कामों को असहज बना सकती हैं।

  • बार-बार संक्रमण होना: विटामिन डी की कमी से रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो सकती है। इससे बच्चे सर्दी-जुकाम और संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।

  • दांत निकलने में देरी: शिशुओं में दांत सामान्य से अधिक देरी से निकल सकते हैं। यह आवश्यक पोषक तत्वों की कमी का संकेत हो सकता है।

  • मांसपेशियों में कमजोरी: बच्चों को जल्दी थकान महसूस हो सकती है या उन्हें शारीरिक गतिविधियों में कठिनाई हो सकती है। मांसपेशियों की ताकत भी कम हो सकती है।

  • टेढ़े पैर (रिकेट्स): गंभीर कमी के कारण हड्डियों में विकृति आ सकती है, जैसे कि टेढ़े पैर। इस स्थिति को रिकेट्स के नाम से जाना जाता है।

  • चिड़चिड़ापन और मनोदशा में बदलाव: शिशु और छोटे बच्चे असामान्य रूप से चिड़चिड़े हो सकते हैं। यह कभी-कभी पोषक तत्वों की कमी के कारण होने वाली असुविधा से जुड़ा होता है।

बच्चों में विटामिन डी की कमी के कारण

बच्चों में विटामिन डी की कमी के कारणों को समझना रोकथाम में सहायक हो सकता है:

  • सूर्य के प्रकाश की कमी: विटामिन डी का उत्पादन तब होता है जब त्वचा सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आती है। सीमित बाहरी गतिविधियों से विटामिन डी का यह प्राकृतिक स्रोत कम हो जाता है।

  • खराब आहार: दूध, अंडे और फोर्टिफाइड अनाज जैसे विटामिन डी से भरपूर खाद्य पदार्थों का कम सेवन विटामिन डी की कमी का कारण बनता है।

  • बिना सप्लीमेंट के केवल स्तनपान: सप्लीमेंट के बिना स्तन के दूध में पर्याप्त विटामिन डी नहीं मिल पाता है।

  • गहरे रंग की त्वचा वाले बच्चे: गहरे रंग की त्वचा वाले बच्चों को पर्याप्त विटामिन डी उत्पादन के लिए अधिक धूप की आवश्यकता हो सकती है।

  • चिकित्सीय स्थितियाँ: कुछ पाचन या गुर्दे संबंधी विकार विटामिन डी के अवशोषण को प्रभावित कर सकते हैं।

जोखिम के कारण

कुछ बच्चों में विटामिन की कमी होने की संभावना अधिक होती है, जिनमें शामिल हैं:

  • जिन शिशुओं को विटामिन डी सप्लीमेंट के बिना केवल स्तनपान कराया जाता है

  • जो बच्चे बाहर बहुत कम समय बिताते हैं

  • जिन लोगों को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता

  • जिन बच्चों को पुरानी बीमारियाँ हैं जो अवशोषण को प्रभावित करती हैं

  • समय से पहले बच्चे

जोखिम और जटिलताओं

यदि बच्चों में विटामिन डी की कमी का इलाज न किया जाए, तो इससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं:

  • रिकेट्स: एक ऐसी स्थिति जिसमें हड्डियां नरम और कमजोर हो जाती हैं

  • विकास और वृद्धि में देरी: शारीरिक विकास के विकास के चरण प्रभावित हो सकते हैं

  • हड्डी टूटना: कमजोर हड्डियां चोट लगने के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं।

  • दंत समस्याएंदांतों के इनेमल का खराब निर्माण और दांत निकलने में देरी

  • कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता: संक्रमणों के प्रति संवेदनशीलता में वृद्धि

रोकथाम एवं प्रबंधन

बच्चों में विटामिन डी की कमी को रोकना सही कदम उठाने से आसान है:

  • पर्याप्त धूप का सेवन: बच्चों को बाहर समय बिताने के लिए प्रोत्साहित करें, खासकर सुबह की धूप में।

  • संतुलित आहार: इसमें विटामिन डी से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे कि फोर्टिफाइड दूध, अंडे, मछली और अनाज शामिल होते हैं।

  • पूरक आहार: बाल रोग विशेषज्ञ विटामिन डी की बूंदों की सलाह दे सकते हैं, खासकर शिशुओं के लिए।

  • नियमित जांच: वृद्धि और पोषण की स्थिति की निगरानी से शुरुआती निदान में मदद मिलती है।

डॉक्टर को कब देखना है

यदि आपके बच्चे में निम्न लक्षण दिखें तो डॉक्टर से परामर्श लें:

  • बच्चों में विटामिन डी की कमी के लक्षण हड्डियों में दर्द या विकास में देरी जैसे हो सकते हैं।

  • बार-बार संक्रमण होना या कम प्रतिरक्षा प्रणाली

  • शिशुओं में दांत निकलने में देरी

  • धनुषाकार पैरों जैसी दिखाई देने वाली अस्थि विकृतियाँ

शीघ्र निदान से दीर्घकालिक जटिलताओं को रोका जा सकता है और स्वस्थ विकास में सहायता मिल सकती है।

निष्कर्ष

बच्चों में विटामिन डी की कमी का अगर जल्दी पता चल जाए तो इसे नियंत्रित किया जा सकता है। बच्चों में विटामिन डी की कमी के लक्षणों पर ध्यान देना, उचित पोषण सुनिश्चित करना और उन्हें बाहरी गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना, उन्हें स्वस्थ रखने में बहुत मददगार साबित हो सकता है। जीवनशैली में कुछ सरल बदलाव दीर्घकालिक जटिलताओं को रोक सकते हैं और उनके मजबूत विकास में सहायक हो सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. बच्चों को प्रतिदिन कितने विटामिन डी की आवश्यकता होती है?
आवश्यक मात्रा उम्र के अनुसार अलग-अलग होती है, लेकिन अधिकांश बच्चों को प्रतिदिन लगभग 400-600 IU की आवश्यकता होती है। डॉक्टर सटीक खुराक बता सकते हैं।

2. क्या केवल सूर्य की रोशनी से ही पर्याप्त विटामिन डी मिल सकता है?
कई मामलों में, सूरज की रोशनी मददगार होती है, लेकिन त्वचा का रंग, स्थान और जीवनशैली जैसे कारकों के लिए आहार संबंधी सहायता या सप्लीमेंट की आवश्यकता हो सकती है।

3. शिशुओं में विटामिन डी की कमी के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
सामान्य लक्षणों में चिड़चिड़ापन, विकास में देरी, दांत निकलने में देरी और हड्डियों की कमजोरी शामिल हैं।

4. क्या बच्चों में विटामिन डी की कमी आम है?
हां, खासकर उन बच्चों में जिन्हें धूप कम मिलती है या जिनका आहार खराब होता है।

5. क्या विटामिन डी की कमी का इलाज किया जा सकता है?
जी हां, उचित आहार, धूप में रहने और डॉक्टर द्वारा बताई गई खुराक लेने से इसका आसानी से इलाज हो सकता है।

चिकित्सक

डॉ. रविकिरण एस.

वरिष्ठ सलाहकार - बाल रोग एवं नवजात शिशु रोग

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